जीवन में गौर करना, गलत बात या कार्य करने से किसी को एतराज नहीं, पर उसे गलत समझा जाए, इससे सबको एतराज है। है न कमाल की बात!
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जीवन में गौर करना, गलत बात या कार्य करने से किसी को एतराज नहीं, पर उसे गलत समझा जाए, इससे सबको एतराज है। है न कमाल की बात!
‘कर्म करो पर फल की चिंता मत करो’ यह विश्व के सबसे बड़े ज्ञानी ‘‘कृष्ण’’ ने विश्व के सबसे अनूठे ग्रंथ ‘‘भगवद्गीता’’ में कहा उनका सबसे अद्भुत श्लोक है। विडंबना यह कि हमारी सारी पूजाएं, यज्ञ, उपवास, वास्तु, ज्योतिष सब फल की आशा से निकले कर्म हैं।
जीवन संवारना चाहते हो तो रोज सुबह दस मिनट एकान्त में अपने साथ बैठकर आज का दिन सार्थक बनाने हेतु सोचो व रात्रि को सोने से पूर्व पांच मिनट कहीं दिन Waste तो नहीं गया, उस बाबत सोचो। देखिये आप जल्द ही क्या-से-क्या हो जाते हैं।
जीवन ‘‘संघर्ष’’ का दूसरा नाम है। संन्यास संघर्ष से भागने का नाम है। जिंदा मनुष्य बनकर जीना चाहते हो तो संघर्षों में जीना सीखना ही होगा।
यह नहीं है कि आम भारतीय के I-Q से ज्यादा I-Q वाले लोग कुछ देशों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि वे उसका सकारात्मक उपयोग करना जानते है, व उन्हें वैसा वातावरण भी उपलब्ध है। जबकि भारतियों का पूरा-का-पूरा I-Q अपनी Image बनाने व लोगों की Smartness से निपटने में ही खर्च हो जाता है।
मनुष्य को रोज आने वाली छोटी-मोटी बीमारियां उसकी Immunity कमजोर होने के कारण आती हैं। जबकि व्यवस्थित भोजन व Acid-Alkaline का ठीक-ठीक संतुलन शरीर के कीटाणुओं को बढ़ने ही नहीं देते।
हर प्रकार की ‘जलन’ ना सिर्फ आपकी असफलता, बल्कि साथ में आपके अविश्वास को भी दर्शाती है। साथ ही आप यह भी गौर नहीं करते कि आप जिससे जलते हैं... आपकी जलन उल्टा उसे और आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित ही करती है।
जीवन में गौर करना कि हर हादसे में कुछ-न-कुछ सीखने लायक अवश्य होता है। हमारी समस्या यह है कि हम हादसे में ही खोकर रह जाते हैं व सीखने का अवसर गंवा बैठते हैं।
किसी भी प्रकार का Creation करना व कर पाना ईश्वर के निकट होने का सबूत है।
किसी भी प्रकार का Creation करना व कर पाना ईश्वर के निकट होने का सबूत है।