प्रेम कोरे शब्दों या भावों से नहीं, आपस में करनेवाले व्यवहारों के अंतिम परिणाम से सिद्ध होता है। आपके आसपास सभी प्रसन्न व स्वस्थ - तो आपका प्रेम सच्चा।
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प्रेम कोरे शब्दों या भावों से नहीं, आपस में करनेवाले व्यवहारों के अंतिम परिणाम से सिद्ध होता है। आपके आसपास सभी प्रसन्न व स्वस्थ - तो आपका प्रेम सच्चा।
बुरा वह नहीं है जो अपना बुरा करने में लगा हुआ है। बुरा वह है जिससे दूसरों का बुरा हो रहा है। ...अपने पूरता तो मनुष्य हमेशा से स्वतंत्र है।
इस संसार में कोई भी समस्या बगैर समाधान के पैदा नहीं होती। ...यानी समस्या कितनी ही जटिल क्यों न हो, उसे सुलझाने का एक-न-एक उपाय तो अवश्य होता ही है।
मनुष्य का जीवन Compromise करने के लिये नहीं होता, बल्कि अपनी प्रतिभा के जोर पर अपनी राह खुद प्रशस्त करने के लिए होता है।
हमारे जीवन के सारे दुःख व असफलताओं के पीछे मात्र और एकमात्र कारण हमारी स्वार्थी प्रवृत्ति व उससे पैदा होने वाले हमारे स्वार्थजनित कार्य हैं।
हम हैं क्या...? हमारी तो देखने, सुनने व तापमान सहन करने तक की एक सीमा है। ...ऐसे में हमारी बुद्धि की समझ का अस्तित्व ही क्या, जो उसके भरोसे हम सफलता के शिखर छूने की उम्मीद लगाये बैठे हैं। जीवन सफल बनाना हो तो वह मन की गहराइयों को समझकर व उसमें डूबकर ही बनाया जा सकता है।
हमारी सबसे बड़ी परेशानी बुद्धि व मन के स्वभाव का सर्वथा भिन्न होना है। अधिकांश लोग इन दोनों के अलग अस्तित्व तक को नहीं जानते, फलस्वरूप उनका पूरा जीवन उनकी बुद्धि व मन के आपसी संघर्ष में पिसकर नष्ट हो
हमारी सबसे बड़ी परेशानी बुद्धि व मन के स्वभाव का सर्वथा भिन्न होना है। अधिकांश लोग इन दोनों के अलग अस्तित्व तक को नहीं जानते, फलस्वरूप उनका पूरा जीवन उनकी बुद्धि व मन के आपसी संघर्ष में पिसकर नष्ट हो
समय बलवान है व समय के लाखों स्वरूप हैं। समय के हर स्वरूप को समझने व पहचानने वाला ही सुख व समृद्धि से भरा जीवन जी सकता है।
जीवन में किये गये कार्यों की सफलता हमने कितनी मेहनत की उस पर निर्भर नहीं है, बल्कि हमारे कौन-से मन ने वे कार्य किये...उस पर निर्भर है।