DNA व Genes आपके शरीर को असर करते हैं, मन को नहीं।
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DNA व Genes आपके शरीर को असर करते हैं, मन को नहीं।
वक्त ने ऐसी करवट ली कि संतों और व्यवसायियों की परिभाषा ही परिवर्तित हो गयी। पाखंड के नाम पर लाखों को लूटने वाले व्यवसायी आजकल ‘संत’ बने बैठे हैं। जबकि वास्तविक संत तो वे हैं जो अपनी कर्मठता से व्यवसाय फैलाकर लाखों को रोजगार दिये हुए हैं।
जो भी ऐतिहासिक मनुष्य हुए हैं, वे वो हैं जिन्होंने कुछ नया किया है। फिर नया उन्होंने चाहे विज्ञान, धर्म, व्यवसाय, संगीत, साहित्य या फिर Movie-making में ही क्यों नहीं किया हो? सोचना यह है कि ‘धर्म व शिक्षा’ के नाम पर हम जो ग्रहण कर रहे हैं, उसमें कुछ नया है भी या ऐसे ही ग्रहण किये चले जा रहे हैं?
जीवन के सारे संघर्ष परिस्थितियों पर कम व हमारी मनोदशा पर ज्यादा निर्भर करते हैं। यही कारण है कि ‘‘दृढ़-मन’’ बड़े-से-बड़े संघर्षों पर भी आसानी से फतह पा लेता है।
जीवन के सारे संघर्ष परिस्थितियों पर कम व हमारी मनोदशा पर ज्यादा निर्भर करते हैं। यही कारण है कि ‘‘दृढ़-मन’’ बड़े-से-बड़े संघर्षों पर भी आसानी से फतह पा लेता है।
आप कितनी गहराइयों से जी रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि आप किसी भी समस्या से निपटने हेतु कितना स्वयं के मन की शक्तियों पर निर्भर हैं, व कितना बाहरी ज्ञान व परिस्थिति पर।
क्या हम इतने पागल हो गये हैं कि शुभ-मुहूर्त में कार्य करने पर भी बार-बार असफल होने के बावजूद...हम फिर-फिर पंडित से शुभ-मुहूर्त निकलवाने पहुंच जाते हैं।
आप कितने बुद्धिमान हैं इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि कितना आपके साथ Unexpected घटता है।
यदि जीवन में कुछ बड़ा कर दिखाने के अहंकार का अनुभव करना हो तो सुबह-शाम करने वाले छोटे-मोटे पचासों अहंकारों को छोड़ना पड़ेगा।
यदि आप वाकई अपना व्यक्तित्व निखारकर जीवन में कोई अद्भुत कार्य करना चाहते हैं तो अपने ‘‘द्रष्टा’’ की उपस्थिति को पहचानें। वह है, तभी तो आपको कार्य करने का आभास हो रहा है।