कोटेशन्स
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जीवन संवारना चाहते हो तो रोज सुबह दस मिनट एकान्त में अपने साथ बैठकर आज का दिन सार्थक बनाने हेतु सोचो व रात्रि को सोने से पूर्व पांच मिनट कहीं दिन Waste तो नहीं गया, उस बाबत सोचो। देखिये आप जल्द ही क्या-से-क्या हो जाते हैं।

-दीप त्रिवेदी

जो मनुष्य मन का संतुलन बिठाना जानता है, वही जीवन में सफल व सुखी हो सकता है। पाप-पुण्य, अच्छा-बुरा यह सब हमारे मन के संतुलन बिगाड़ने की शिक्षाएं हैं, और दुर्भाग्य से यही सब हमारे धार्मिक गुरु व शास्त्र हमें धड़ल्ले से देने में लगे हुए हैं। परिणाम यह कि सुखी व सफल लाखों में कोई एक ही हो पा रहा है; और वह भी वो जो उनके चंगुल से बच निकलता है।

-दीप त्रिवेदी

हिंदूओं ने भगवान ही उन्हें स्वीकारा जिन्होंने पापियों का नाश किया। हम भी क्यों न उन्हें सीधी राह पर ले आएं ‘‘जो’’ हमारे ही खून-पसीने की कमाई से स्वयं के आश्रम फैलाने में लगे हुए हैं। ...यदि आपने यह कमाल कर दिखाया तो आपके भारत को विश्व का ‘‘नंबर-वन’’ राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

-दीप त्रिवेदी

जागृत व्यक्ति के लक्षण क्या हैं? एक तो वह सिर्फ अपनी मरजी से जाता और आता है। दूसरा बाहर की दुनिया के कोई कारण उसे प्रभावित नहीं करते। और तीसरा, वह जो कार्य करने की ठान लेता है, उसे पूरा करके ही दम लेता है।

-दीप त्रिवेदी

इस विश्व में छोटे-से-छोटा कण या मच्छर भी अकारण नहीं। यदि इस बह्मांड में कोई बेवजह जिये जा रहा है तो वह मनुष्य के अलावा और कोई नहीं। ...आखिर उससे बुद्धिमान भी तो दूसरा कोई नहीं।

-दीप त्रिवेदी

जैसे विज्ञान को किसी वस्तु के रूपांतरण हेतु ‘‘ऊर्जा’’ की आवश्यकता पड़ती है, वैसे ही आपको अपना स्वभाव बदलने हेतु भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि आप में ऊर्जा नहीं तो चाहकर भी आप अपने में बदलाव नहीं ला सकते हैं।

-दीप त्रिवेदी

एडीसन से प्रयोग होते हैं इसी से वह एडीसन है। हमें कार्य करने पड़ते हैं, इसीलिए हम असफल हैं। जबकि बुद्ध, कृष्ण व जीसस वे हैं जिनसे सबकुछ हो रहा है।

-दीप त्रिवेदी

जब कयामत के दिन सारे फैसले हो ही जाने वाले हैं, तो फिर आज बंदूक उठाकर व निर्दोषों की हत्या कर ये आतंकवादी कौन-सा फैसला करने में लगे हुए हैं?

-दीप त्रिवेदी

इस ब्रह्मांड में एक कण-मात्र भी न तो पैदा किया जा सकता है, ना ही उसे मिटाया जा सकता है। कुछ अंश तक उसका रूपांतरण किया जा सकता है...व कुछ उसका रूपांतरण अपने आप हो रहा है।

-दीप त्रिवेदी

कोई भी मनुष्य कितना ही ज्ञानी क्यों न हो, या फिर वह कितनी ही करुणा से क्यों न भरा हो; उसके लिये भी शरीर अपना स्वभाव नहीं छोड़ता है। हमारी ही तरह बीमार उनका शरीर भी पड़ता है; और जहर पिलाये जाने या सूली पर लटकाये जाने पर मृत्यु उनकी भी होती ही है। फिर भी उन्हें चमत्कारों से जोड़ना उनके व्यक्तित्व से खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?

-दीप त्रिवेदी

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