बुद्धि तोड़कर देखती है, क्योंकि उसे सिर्फ वस्तुओं की पहचान है। जबकि मन वस्तुओं को अलग से जानता ही नहीं; वह तरंगों व उनकी गहराइयों को ही समझता है। बस इन दोनों में आपसी Communication न बिठा पाने के कारण ही सभी पूरी तरह असफल हैं।
-दीप त्रिवेदी