एकसाथ कई कार्य हाथ में लेने से सारे कार्य बिगड़ जाते हैं। उन्हें एक-एक कर निपटाने से सभी को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।
-दीप त्रिवेदी
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एकसाथ कई कार्य हाथ में लेने से सारे कार्य बिगड़ जाते हैं। उन्हें एक-एक कर निपटाने से सभी को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।
-दीप त्रिवेदी
किसी भी प्रकार की कला सीधे तौर पर ईश्वर को प्रकट करती है। मंदिर व चर्चों में तो ईश्वर के नाम पर किसी को बिठा दिया गया है।
-दीप त्रिवेदी
जैसे शारीरिक बीमारियां होने पर कड़वी दवाइयां पिलायी जाती है, वैसे ही मानसिक बीमारी होने पर कड़ा व्यवहार भी करना ही पड़ता है। यही कारण है कि सिर्फ मीठा व अच्छा बोलनेवाले हमारे जीवन के लिये बड़े घातक सिद्ध होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य के सारे दुःख-दर्दों की जड़ उसके ‘मन’ के उपद्रव हैं। अतः विश्व में से ‘‘दुःख-दर्द’’ गायब करने का एक ही उपाय है कि मनुष्य को ‘मन’ की कार्यप्रणाली बाबत ठीक से शिक्षित किया जाए।
-दीप त्रिवेदी
शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?
-दीप त्रिवेदी
हम ‘‘मनुष्य’’ के शरीर, संस्कृति व चेतना के जिस Refined स्वरूप को देख रहे हैं, वह अरबों वर्षों के करोड़ों असफल प्रयास के बाद प्राप्त हुआ है। ऐसे मूल्यवान जीवन को सिर्फ शिक्षा, शादी, बच्चे, कमाने व बुढ़ापे के रोने में नष्ट नहीं किया जा सकता।
-दीप त्रिवेदी
जो कार्य आप करना नहीं जानते उसे अच्छे से पार पाड़ने का एक ही सिद्धांत है, जो जानता है उसके प्रति पूर्ण विश्वास के साथ समर्पण।
-दीप त्रिवेदी
‘‘भाग्य’’ सिवाय अपनी असफलता छिपाने के एक खूबसूरत बहाने से ज्यादा और कुछ नहीं।
-दीप त्रिवेदी
बेवकूफी व बदमाशी में फर्क क्या है? अन्जाम तो दोनों का बराबरी पर ही भुगतना पड़ता है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जन्म लिया है तो कर्म करना एकमात्र ‘‘पूजा’’ है, और कर्तव्य-कर्म निभाना एक मात्र ‘‘ध्यान’’ है। अलग से पूजा या ध्यान वे लोग करते हैं जो कर्मों से विमुख हो चुके हैं।
-दीप त्रिवेदी