‘‘मनुष्य’’ जानवरों और पेड़-पौधों से ज्यादा संवेदनशीलता की संभावना लेकर पैदा होता है, परन्तु दुर्भाग्य से वह उसका उपयोग नहीं कर पाता है। क्योंकि वह प्रकृति के साथ जीने के बजाय अपनी बुद्धि से जीने की कोशिश में लगा हुआ है।
-दीप त्रिवेदी