बड़े कार्य ऊंची महत्वाकांक्षाओं के चलते नहीं, बल्कि उच्च कोटि के ध्यान व बड़े पैमाने की कटिबद्धता के सहारे निपटाये जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
Copyright © 2012. ---
बड़े कार्य ऊंची महत्वाकांक्षाओं के चलते नहीं, बल्कि उच्च कोटि के ध्यान व बड़े पैमाने की कटिबद्धता के सहारे निपटाये जाते हैं।
-दीप त्रिवेदी
बेवकूफी व बदमाशी में फर्क क्या है? अन्जाम तो दोनों का बराबरी पर ही भुगतना पड़ता है।
-दीप त्रिवेदी
जीना, शौक से जीना, आनंदपूर्वक जीना, सफलता की ओर कदम बढ़ाना वगैरह कैसे अधार्मिक हो जाता है? अधर्म की तो शुरुआत ही डर कर वस्तुओं के त्याग करने से होती है।
-दीप त्रिवेदी
आपने कुछ किया है या आप कुछ कर सकते हैं, यह गलतफहमी कभी मत पालना। ...यह स्पष्टरूप से समझ लें कि आपसे सबकुछ आपका स्वभाव ही करवा रहा है।
-दीप त्रिवेदी
जैसे शारीरिक बीमारियां होने पर कड़वी दवाइयां पिलायी जाती है, वैसे ही मानसिक बीमारी होने पर कड़ा व्यवहार भी करना ही पड़ता है। यही कारण है कि सिर्फ मीठा व अच्छा बोलनेवाले हमारे जीवन के लिये बड़े घातक सिद्ध होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
जिन्होंने भी जीवन में बड़ी सफलता पायी है, उन्होंने जाने-अनजाने दृढ़तापूर्वक मन की चार में से कोई एक राह पकड़ी ही हुई है; आनंद, स्वभाव, सहजता या स्वतंत्रता। और जो पकड़ी है...फिर उसका हरहाल में लगातार साथ दिया है।
-दीप त्रिवेदी
जन्म एक क्षण है। मृत्यु भी एक क्षण है। इन दोनों के बीच के क्षणों के जोड़ को ही हम जीवन कहते हैं। इस लिहाज से समय वाकई मूल्यवान है। हम अपना समय कहां व किन बातों में गंवा रहे हैं... यह गौर करते ही हमारी सारी समस्याओं का अंत आ सकता है।
-दीप त्रिवेदी
मैं आपके उन धर्म गुरुओं में से हूँ जिसने जैसे ही पाया कि मुझ में आगे बढ़ने के कोई गुण जैसे कला, विज्ञान, मेहनत करने की लगन या डिग्री कुछ भी नहीं; तो मैंने आश्वासनों व आशीर्वादों की दुकान खोल ली। ...और देखो आज मेरे पास एकड़ों में जमीन, अपना आश्रम व आप जैसे हजारों बुद्धिमान श्रद्धालु हैं।
-दीप त्रिवेदी
कृष्ण की पूजा करने से भगवद्गीता समझना बुद्धिमत्ता है।
-दीप त्रिवेदी
यहां जीवन में बगैर दिशा पकड़े व बिना मंजिल की सोचे मन की मस्ती से चलते राही ‘‘सफलता’’ के कई बड़े मुकाम स्वतः ही सर कर लेते हैं।
-दीप त्रिवेदी