आप मेरा विश्वास करें कि ‘आप’ अपने समेत सबके जीवन के उतार-चढ़ावों को सिर्फ देखने वाले हैं। आपकी दिक्कत यह है कि आप अपने को करने वाला मानते हैं।
-दीप त्रिवेदी
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आप मेरा विश्वास करें कि ‘आप’ अपने समेत सबके जीवन के उतार-चढ़ावों को सिर्फ देखने वाले हैं। आपकी दिक्कत यह है कि आप अपने को करने वाला मानते हैं।
-दीप त्रिवेदी
यहां पर बदलती परिस्थितियों के गणित को समझने वाला वर्तमान में संतुष्ट होकर जीता है। हां, उसकी निगाह बदलती परिस्थितियों पर अवश्य बनी रहती है। ...फलस्वरूप जिस क्षण उसे कुछ भी Ready Platter पर मिलता नजर आता है, वह उस तक को तत्क्षण भुना लेता है।
-दीप त्रिवेदी
ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?
-दीप त्रिवेदी
‘‘वक्त’’ वह धार है जो ‘‘कृष्ण’’ जैसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व को भी मौत की नींद सुला देता है। लेकिन उनका जीया जीवन व उनकी कही भगवद्गीता उन्हें अमर बना देती है। मरना आपको भी है, फिर कुछ ऐसा कर के क्यों नहीं मरते कि मर के भी न मरो।
-दीप त्रिवेदी
जीवन को आगे बढ़ाने का रहस्य सिर्फ आपका ‘मन’ जानता है। मन और बुद्धि का कोई Communication नहीं। अतः जो बातें आपकी बुद्धि को आगे बढ़ने वाली जान पड़े, समझ लेना वह पीछे धकेल देगी; व जो पीछे ले जाने वाली मालूम पड़े, समझ लेना उसी के सहारे आप सफलता के शिखर छू पाएंगे।
-दीप त्रिवेदी
‘अपने’ मन की कार्यप्रणाली समझने वाला जल्द ही सबके मन समझ जाता है। इसी से वह दूसरों पर राज करता है। हम व्यर्थ ही जीवनभर अपने बजाय दूसरों के मन समझने में लगे रहते हैं।
-दीप त्रिवेदी
कृष्ण की पूजा करने से भगवद्गीता समझना बुद्धिमत्ता है।
-दीप त्रिवेदी
न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में जो सफल हैं वो इसलिए नहीं कि वे उच्च शिक्षित हैं, बहुत ज्ञानी हैं या कर्मठ होकर कार्य करने वाले हैं। बल्कि उनकी सफलता का रहस्य यह है कि उन्होंने जीवन में सिर्फ अत्यावश्यक ज्ञान व जरूरत पूरती ही शिक्षा ग्रहण की है ...तथा कार्यों में भी वे यथायोग्य चेष्टा ही कर रहे हैं। ऐसा कर वे अपने बहुमूल्य समय व ऊर्जा की बचत करते हैं, और अंत में वही उन्हें सफलता के मार्ग पर लगाने में सहायक सिद्ध होती है।
-दीप त्रिवेदी
आप सिर्फ हफ्ताभर अपने मन में उठ रही तरंगों, आसपास घट रही घटनाओं व प्रकृति की हलचलों को ध्यान से निहारो। आपको समझ आ जाएगा कि आपकी झूठी आशाओं व आपके खोटे डरों को छोड़कर ‘‘ईश्वर’’ की जरूरत किसी को नहीं।
-दीप त्रिवेदी