जीवन में आपके साथ या आपके आसपास कुछ भी ‘‘अप्रत्याशित’’ घटता है तो वह सिवाय आपकी मूर्खता के और कुछ नहीं दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
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जीवन में आपके साथ या आपके आसपास कुछ भी ‘‘अप्रत्याशित’’ घटता है तो वह सिवाय आपकी मूर्खता के और कुछ नहीं दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
क्या विज्ञान कभी जीवन पैदा कर पाएगा? नहीं, सवाल ही नहीं उठता। क्योंकि पैदा या नष्ट करने की सत्ता यहां किसी के पास नहीं।
-दीप त्रिवेदी
जीवन अपने व दूसरों के उद्धार हेतु पुरजोर ‘‘कर्म’’ करने व जब मौका मिले...दिल खोलकर आनंद लेने का दूसरा नाम है। जीवन का और कोई मकसद होता ही नहीं है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन के हर क्षेत्र में सम्पूर्ण आत्मनिर्भर होना आपका प्रथम कर्तव्य है। यदि आप किसी भी चीज के लिए किसी पर भी बोझ हैं...तो आपका जीवन व्यर्थ गया।
-दीप त्रिवेदी
सफल मनुष्य-जीवन जीने के लिए मनुष्य के स्वभाव में...एक कलाकार हृदय, वैज्ञानिक दृष्टि, व्यावसायिक बुद्धि, आत्मनिर्भरता का गुमान, आनंद लेने की कला, जीवन संबंधित सारे शौक व अंतःमस्ती; इन सातों स्वभाव का यथायोग्य मिश्रण होना आवश्यक है।
-दीप त्रिवेदी
आप सिर्फ इतना क्यों नहीं समझते कि घटनायें बाहर घट रही हैं और आपका जीवन आपके भीतर है। फिर बाहर चाहे जो न क्यों हो जाए, उससे आपका जीवन क्यों प्रभावित होता है? क्योंकि आप उन घटनाओं को जबरदस्ती अपने से जोड़ कर देखते हैं।
-दीप त्रिवेदी
जीवन एक ऐसा व्यवसाय है जहां कुछ खोकर कुछ पाना है। ‘कम खोकर - ज्यादा पाना’ यहां के व्यावसायिक सफलता की परिभाषा है। ‘बड़ा खोकर - छोटा पाना’ जीवन में घाटे का सौदा है। ...वहीं खोने के डर से पाने से ही वंचित रह जाना, कोरी मूर्खता है।
-दीप त्रिवेदी
हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।
-दीप त्रिवेदी
आप मन और जीवन समझना चाहते हैं, तो वह धर्म या विद्यालय नहीं सिखा पाएंगे। उस हेतु तो आपको अपने चारों तरफ घट रही प्राकृतिक घटनाओं को ध्यान से देखना पड़ेगा।
-दीप त्रिवेदी
जीवन को गौर से देखने पर पाओगे कि यहां के हर सुख के साथ दुःख... व हर दुःख के साथ सुख जुड़ा ही हुआ है। अतः जो कुछ भी घट रहा है उसमें अपनी निगाह सिर्फ सुख पर बनाये रखने से ही आप सदैव सुखी हो सकते हैं।
-दीप त्रिवेदी