धर्म क्या है? मन व जीवन का विज्ञान। बुद्ध, कृष्ण, जीसस क्या हैं? हमारे मन व जीवन के Doctor।
-दीप त्रिवेदी
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धर्म क्या है? मन व जीवन का विज्ञान। बुद्ध, कृष्ण, जीसस क्या हैं? हमारे मन व जीवन के Doctor।
-दीप त्रिवेदी
जितना ज्ञान हमारे मन की गहराइयों में छिपा पड़ा है... उससे रत्तीभर ज्यादा ज्ञान बाहर के जगत में नहीं। हां, जानकारियों की Update अवश्य हमें बाहर के जगत से लेनी पड़ती है। ...यहां ‘ज्ञान’ व ‘जानकारी’ का फर्क समझने लायक है।
-दीप त्रिवेदी
जीवन के सारे संघर्ष परिस्थितियों पर कम व हमारी मनोदशा पर ज्यादा निर्भर करते हैं। यही कारण है कि ‘‘दृढ़-मन’’ बड़े-से-बड़े संघर्षों पर भी आसानी से फतह पा लेता है।
-दीप त्रिवेदी
जो सब कर रहे हैं वही आप भी कर रहे हैं। फिर रोते क्यों हैं...? जो सबका हो रहा है वह आपका भी हो ही तो रहा है।
-दीप त्रिवेदी
अपना मन जाने बगैर जीवन की कोई सफलता हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन मन समझने हेतु ना तो किताबें उपलब्ध हैं ना शिक्षाएं ही। मनुष्य की इतनी असफलता का यही एक कारण है।
-दीप त्रिवेदी
जनसंख्या Liability भी हो सकती है व Asset भी। यदि हर वयस्क काम करे तो ही जनसंख्या Asset हो सकती है। एक कमाए व चार खायें, यह परिवार ही नहीं, देश के लिए भी घातक है। ...ऐसे में पंडितों व संन्यासियों को पालने का सवाल ही कहां आता है?
-दीप त्रिवेदी
यदि आप अपने ‘होनेपन’ व ‘स्वभाव’ को अलग-अलग पहचान लेंगे, तो उसके बाद आपके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आएगी।
-दीप त्रिवेदी
यह मत समझना कि विषय ‘चिंता’ का है, इसीलिए आपको चिंता पकड़ रही है। क्योंकि समान खबर पर हर व्यक्ति की चिंता की तीव्रता भिन्न-भिन्न होती है।
-दीप त्रिवेदी
हमें समझना यह है कि जीवन को बढ़ाने के लिये डिग्रियां ज्यादा सहायक है कि Concentration। बुद्ध से लेकर एडीसन तक को देखने पर तो Concentrationही ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई दे रहा है।
-दीप त्रिवेदी
‘‘बुद्ध’’ समय का वो कमाल है जिनका जन्म भी भारत में हुआ व पैंतालिस वर्षों तक उन्होंने प्रवचन भी भारत में ही दिया। लेकिन उन्होंने हिंदू पाखंडों का विरोध क्या किया, भारत ने उनकी अमूल्य धरोहर को ही भारत से खदेड़ दिया। पिछले दो-हजार वर्ष के भारत के इतिहास में यह उसका सबसे बड़ा नुकसान है।
-दीप त्रिवेदी