कोटेशन्स
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जीवन साठ वर्ष का है, यह मानकर हम पूरे जीवन को ‘‘एक’’ मानकर जीते हैं। इसी कारण भूतकाल की यादें व भविष्य का डर हमें सताता रहता है। जबकि वास्तव में जीवन खरबों क्षणों के जोड़ का नाम है। अतः हर क्षण-नया क्षण। और जब हर क्षण नया क्षण है...तो कौन-सा भूतकाल व किसका भविष्य?

-दीप त्रिवेदी

आपका ‘मन’ दरअसल तरंगों का जोड़ है। अतः यह कभी भी विज्ञान की पकड़ में नहीं आने वाला। और चूंकि आप अपने सारे सुख-दुःख भी मन के परदे पर ही झेलते हैं, इसलिए विज्ञान कभी भी आपके भीतर कितना दुःख छिपा है या वह कहां से आ रहा है; नहीं बता सकता। ना ही वह कभी Surgery कर उस दुःख को आपके शरीर से अलग कर पाएगा।

-दीप त्रिवेदी

नफरत व तिरस्कार, फिर चाहे वह वस्तु से हो या व्यक्ति से; ‘हिंदू’ धर्म में कोई स्थान नहीं। ...जबकि यह So-called हिंदू संत आपमें व्यर्थ के ‘पापभाव’ पैदा कर अपने आश्रम फैलाये चले जा रहे हैं। कैसे तो आप हिंदू व कैसे तो यह हिंदू संत?

-दीप त्रिवेदी

हमारी सबसे बड़ी परेशानी बुद्धि व मन के स्वभाव का सर्वथा भिन्न होना है। अधिकांश लोग इन दोनों के अलग अस्तित्व तक को नहीं जानते, फलस्वरूप उनका पूरा जीवन उनकी बुद्धि व मन के आपसी संघर्ष में पिसकर नष्ट हो

-दीप त्रिवेदी

‘भय’ और ‘लोभ’ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक से स्वयं को बचा लो...दूसरे से स्वतः ही छुटकारा मिल जाएगा।

-दीप त्रिवेदी

न शिक्षा, न समाज, न तथाकथित धर्म हमें यह समझा रहे कि जीवन में सरलता, निर्दोषता, स्वार्थहीनता, भोलापन व करुणा इत्यादि का क्या महत्व है। जबकि हकीकत यह है कि संसार की सभी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं, सारे आविष्कार व सारी कलाएं ऐसे ‘‘मन’’ वाले व्यक्तियों के जहन से ही निकली है।

-दीप त्रिवेदी

क्या कभी आपने शेर को शिकार करते सिखाने की, या बंदरों को उछलना सिखाने की; या फिर गाय को मांसाहार न खाने की सलाह देने वाली Classes देखी है? तो फिर हमें क्या व क्यों सिखाया जा रहा है? कहीं हमारे धर्मगुरु व शास्त्र हमें जानवरों से भी गये-बीते तो नहीं समझ रहे?

-दीप त्रिवेदी

धर्मगुरु दुनिया को भ्रमित कर अपनी दुकानें चला रहे, यह तो छोटा गुनाह है। उनका बड़ा गुनाह तो यह कि वे श्रेष्ठ मनुष्यों के गुण व उनकी सोच को दबाकर तथा व्यर्थ के चमत्कारों से उनको जोड़ के अपनी दुकान चला रहे हैं।

-दीप त्रिवेदी

सम्पूर्ण विज्ञान की पहुंच Time और Space के भीतर है। ...जबकि जगत के सारे रहस्य Time व Space की सीमा के बाहर है। इसलिये कई रहस्य विज्ञान के लिये हमेशा रहस्य ही बने रहेंगे।

-दीप त्रिवेदी

जो व्यक्ति ‘समय’ को पहचानकर उसके अनुरूप बरतता है...उसका ‘समय’ जल्द ही बदल जाता है।

-दीप त्रिवेदी

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