मनुष्य को अपने जीवन में "Third Force" की उपस्थिति का कई बार एहसास होता भी है, परंतु वह उसे ईश्वर व भाग्य से जोड़ने के कारण पहचानने में मात खा जाता है।
-दीप त्रिवेदी
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मनुष्य को अपने जीवन में "Third Force" की उपस्थिति का कई बार एहसास होता भी है, परंतु वह उसे ईश्वर व भाग्य से जोड़ने के कारण पहचानने में मात खा जाता है।
-दीप त्रिवेदी
इस विश्व में छोटे-से-छोटा कण या मच्छर भी अकारण नहीं। यदि इस बह्मांड में कोई बेवजह जिये जा रहा है तो वह मनुष्य के अलावा और कोई नहीं। ...आखिर उससे बुद्धिमान भी तो दूसरा कोई नहीं।
-दीप त्रिवेदी
‘‘निर्विचार मनोदशा’’ का व्यक्ति ही जीवन में मनुष्य की तरह जी सकता है। लेकिन यदि आपकी कोई जिद है या आपके कुछ सिद्धांत हैं या फिर आपका कोई स्थिर स्वभाव है, तो दूसरे मनुष्य आपका उपयोग वस्तु की तरह करते चले जाएंगे।
-दीप त्रिवेदी
हम कितने कमाल हैं? हमारे पास शेर जैसे पंजे नहीं फिर भी सबको काटने दौड़ते हैं। सांप जैसा जहर नहीं, फिर भी खुन्नसें पालते रहते हैं। पक्षी जैसे पंख नहीं फिर भी कल्पना लोक में उड़ते ही रहते हैं। जब आपमें इन्सानों के कोई गुण ही नहीं तो जीवन में सफलता कैसे पाओगे?
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का बचपना तो यह कि जहां सफलता का श्रेय लेने की उसमें होड़ लगी रहती है, वहीं असफलता का मटका किसी और पर फोड़ने की फिराक में भी वह लगा ही रहता है। परिणाम यह कि कभी भी वह घटना का ठीक से आकलन कर नहीं पाता।
-दीप त्रिवेदी
ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?
-दीप त्रिवेदी
मोह रहित मनुष्य वह है जो ना तो कुछ पाने को दौड़ रहा, और ना ही कुछ छोड़ने पर मचल रहा।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य का उसके स्वभाव के अलावा कोई शत्रु नहीं।
-दीप त्रिवेदी