कोटेशन्स
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स्वयं पर विश्वास करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। दूसरों के भरोसे जीने से फिर चाहे वह भगवान ही क्यों न हो, आत्मविश्वास घटता है। और जीवन सफल आत्मविश्वास से भरपूर लोगों का ही होता है।

-दीप त्रिवेदी

आपके भीतर दो आधार मजबूती से उपस्थित हैं। एक आपका ‘द्रष्टा’ व दूसरा आपका ‘अहंकार’। अहंकार वह जो सब कुछ कर रहा है व द्रष्टा वह जो सबकुछ होता हुआ देख रहा है।

-दीप त्रिवेदी

अहंकार संतुलन बनाना जानता ही नहीं। वह या तो संसार में डूबा रहता है या फिर घबराकर संन्यास ले लेता है। ...लेकिन संसार में रहकर मन से संन्यासी होना उसे आता ही नहीं...।

-दीप त्रिवेदी

The concept of "God" भय के कारण अस्तित्व में आया है। ‘भय’ असुरक्षा व चाह से पैदा हुआ है। ...मजा यह कि इन दोनों की मृत्यु के बाद कोई जरूरत नहीं।

-दीप त्रिवेदी

मनुष्य जीवन का एक ही सत्य है कि साठ वर्ष बाद उसे इस संसार को अलविदा कहकर जाना है। ....ऐसे में उसका एक ही कर्तव्य बचता है कि वह अपने आने के ऐतिहासिक पदचिह्न इस संसार में छोड़कर ही मरे।

-दीप त्रिवेदी

किसी भी प्रकार का Creation करना व कर पाना ईश्वर के निकट होने का सबूत है।

-दीप त्रिवेदी

हमें जीवन में सुख-शांति व समृद्धि के लिए ज्ञान नहीं, ऊर्जा चाहिए। ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत ‘‘ध्यान’’ है व उसका सबसे बड़ा शत्रु ‘‘सोचना’’ है।

-दीप त्रिवेदी

आप कैसे हैं, यह इतना महत्वपूर्ण नहीं जितना कि ‘‘आप जैसे हैं वैसे दिखते हैं या नहीं।’’

-दीप त्रिवेदी

‘हां’ आस्तिकता है और ‘ना’ नास्तिकता है। आपने जीवन में जितनी चीजों का दृढ़तापूर्वक निषेध कर रखा है...उतने ही आप अधार्मिक। अधार्मिकता का अर्थ ही ईश्वर की रचनाओं का अस्वीकार है।

-दीप त्रिवेदी

पहले तो हम सिर्फ मंदिर में जाकर कुछ चढ़ा आते थे। अब तो पंडितों की लालच इतनी बढ़ गयी है कि वे आश्वासनोंें के नाम पर अंगूठी, धागे व प्रतिष्ठान भी बेचकर गरीब जनता को लूटने में लग गए हैं।

-दीप त्रिवेदी

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