धन की दौड़ का आलम तो यह है कि कुछ राष्ट्र अपने हथियार बेचने हेतु दुनिया पर से युद्ध के बादल हटने ही नहीं देते।
-दीप त्रिवेदी
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धन की दौड़ का आलम तो यह है कि कुछ राष्ट्र अपने हथियार बेचने हेतु दुनिया पर से युद्ध के बादल हटने ही नहीं देते।
-दीप त्रिवेदी
यदि हमेशा आनंद में रहना चाहते हो तो जीवन के संघर्षों से भी एक खेल मानकर उलझो। देखें; संघर्ष हमसे जीतता है या हम संघर्ष से?
-दीप त्रिवेदी
जीवन के सारे संघर्ष परिस्थितियों पर कम व हमारी मनोदशा पर ज्यादा निर्भर करते हैं। यही कारण है कि ‘‘दृढ़-मन’’ बड़े-से-बड़े संघर्षों पर भी आसानी से फतह पा लेता है।
-दीप त्रिवेदी
‘‘सत्य’’ शारीरिक तौर पर किया कर्म या भावना में बह के किये कर्म का नाम नहीं। सत्य उस कर्म से आये परिणाम का नाम है। किसी ने यदि आपमें सुधार लाने को गाली दी तो उसने गाली दी ही कहां? ...उसने तो आप में सुधार लाने की चेष्टा की।
-दीप त्रिवेदी
जो मनुष्य अपने जीवन के सफलता या असफलताओं की जवाबदारी स्वयं ले...वह धार्मिक। जो यह जवाबदारी पूजा-पाठ, ज्योतिष, वास्तु, परिवार या मित्रों को सौंपे...वह अधार्मिक।
-दीप त्रिवेदी
अहिंसा को उपलब्ध होने के लिए पक्षपात रहित आंख चाहिए। यदि आप अपने समेत सबके साथ न्यायाधीश जैसा व्यवहार कर सकें तो ही आपके जीवन में से हिंसाएं कम होंगी।
-दीप त्रिवेदी
भूत या भविष्य का किसी भी स्वरूप में सामने आना या उस बाबत एक क्षण को भी कुछ सोचना ...यही तो ‘अहंकार’ है।
-दीप त्रिवेदी
विज्ञान वस्तुओं की सायकोलोजी के रूपांतरण का नाम है। धर्म मनुष्य की सायकोलोजी को रूपांतरित करनेवाले ज्ञान का नाम है। विज्ञान मनुष्य को भौतिक सुख तो दे सकता है, परंतु मानसिक सुख हेतु तो मनुष्य को अपनी सायकोलोजी रूपांतरित करनी ही रही। अतः दोनों का यथायोग्य समन्वय मनुष्य व संसार दोनों के उत्थान का मार्ग है।
-दीप त्रिवेदी
‘आनंद’ सिर्फ उन कर्मों से उत्पन्न होता है, जिनका फल हाथोंहाथ मिलता है। ‘कर्म’ आज व ‘फल’ कल, ऐसे कर्मो से केवल सुख-दुःख उत्पन्न होते हैं।
-दीप त्रिवेदी
जीवन में किये गये कार्यों की सफलता हमने कितनी मेहनत की उस पर निर्भर नहीं है, बल्कि हमारे कौन-से मन ने वे कार्य किये...उस पर निर्भर है।
-दीप त्रिवेदी