दुनिया में दो ही तरीके के लोग सुखी व सफल हो सकते हैं। एक तो वे जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान मान ले...फिर तो अच्छा-बुरा, पाप-पुण्य सब उसकी मरजी से हो रहा है, बात समाप्त हुई। या तो वे जो मान ले कि ईश्वर है ही नहीं और अपनी सम्पूर्ण जवाबदारी स्वयं उठा ले, बात फिर भी समाप्त हो गयी। लेकिन क्योंकि सभी इन दो पाटनों के बीच में झूला झूल रहे हैं, इसलिए दुःखी व असफल हैं।
-दीप त्रिवेदी