भीड़ हर सौ साल में 500 करोड़ की पैदा होती है। चेतनाशील व्यक्ति सौ साल में पांच सौ से ज्यादा पैदा नहीं होते। फैसला आपको करना है कि आपको भीड़ में रहना व मरना है; या फिर अपना अलग व्यक्तित्व पैदा कर हमेशा के लिये इतिहास में अमर हो जाना है।
-दीप त्रिवेदी