जीवन में आपके साथ या आपके आसपास कुछ भी ‘‘अप्रत्याशित’’ घटता है तो वह सिवाय आपकी मूर्खता के और कुछ नहीं दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
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जीवन में आपके साथ या आपके आसपास कुछ भी ‘‘अप्रत्याशित’’ घटता है तो वह सिवाय आपकी मूर्खता के और कुछ नहीं दर्शाता है।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जिस मात्रा में धर्म के विषय में अंधा है ठीक उसी मात्रा में वह जीवन के सारे सत्यों को समझने में भी अंधा होता है। और यही कारण है कि विश्व आंख वाले अंधों से भरा पड़ा है।
-दीप त्रिवेदी
कुछ पाने पर अहंकार पकड़ना सिर्फ इस बात का सबूत है कि आपको अपनी योग्यता से ज्यादा मिल गया है।
-दीप त्रिवेदी
यदि हम सिर्फ एक क्षण को भी सोचें कि यह तथाकथित धर्म ‘‘झूठी-आशा’’ देने के बदले में पूरी दुनिया से मनुष्य के कितने कीमती संसाधन व कितना मूल्यवान समय खा रहे हैं; तो सारे मंदिरों, मस्जिदों व चर्चों पर आज ही ताले लग जायें और वहां स्कूल व अस्पताल खुल जाएं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जीवन...कुदरत के नियम, उसका अपना स्वभाव, उसकी बुद्धि, मन, हृदय, DNA तथा उसके अपने अनुभवों समेत की सात वस्तुओं से प्रभावित होता है। आठवीं कोई वस्तु या कारण उसे रत्तीभर प्रभावित नहीं करते।
-दीप त्रिवेदी
हमारे मन रूपी कण में ईश्वर अपने तीनों Dimensions के साथ पूरी दृढ़ता से उपस्थित है।
-दीप त्रिवेदी
समय, संजोग व परिस्थिति की मांग पर सबके हित में जब, जो और जैसा भी करने योग्य हो...वह करने की क्षमता रखने वाला धार्मिक; बाकी सब अधार्मिक।
-दीप त्रिवेदी
जो ‘नाम’ और ‘दाम’ के लिये काम करते हैं वे जीवन में कहीं नहीं पहुंच पाते। ...पर जो अपनी ही धुन में सिर्फ काम के लिए काम करता है, वह ‘‘नाम और दाम’’ दोनों पा जाता है।
-दीप त्रिवेदी
क्या पुनर्जन्म होता है? अवश्य...। लेकिन प्रकृति के इस सिद्धांत पर कि यदि आप हैं ही नहीं तो ‘पैदा’ नहीं किये जा सकते; और आप हैं तो मिटाये नहीं जा सकते।
-दीप त्रिवेदी
समस्या कितने ही विकराल स्वरूप में प्रकट क्यों न हो जाए, उसका कोई-न-कोई उपाय Time या Space में होता ही है। सवाल बिना घबराये मन की गहराइयों से उसपर चिंतन करने का ही है।
-दीप त्रिवेदी