कोटेशन्स
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समझ नहीं आता कि यह जैन मुनि अच्छे खाने, अच्छे कपड़े पहनने से लेकर अच्छे से नहाने व खुशबूदार रहने को भी कैसे पाप कहते हैं? फिर तो उनके अनुसार सारे जानवर वैसे ही ‘‘पक्के जैन’’ हो गये।

-दीप त्रिवेदी

जो भी परिणामकारी ज्ञान है वह मनुष्य के भीतर मन की गहराइयों में ही छिपा पड़ा है। यही कारण है कि मोजार्ट की धुनें हो या उमर खय्याम की रुबाइयां, कृष्ण की भगवद्गीता हो या आईन्स्टाइन का दुनिया बदलकर रख देने वाला सिद्धांत E=mc2; सब भीतर से बाहर निकली चीजें ही हैं।

-दीप त्रिवेदी

आपके मन के पटल पर हर Action की Equal और Opposite Reaction होती है। फिर उस Reaction की हजारों Sub Reactions अपने आप होती रहती हैं। इसीलिए अपने मन के विरुद्ध जाने से पूर्व हजार बार सोच लेना।

-दीप त्रिवेदी

यदि जीवन में आप वाकई क्रोध से छुटकारा पाना चाहते हैं तो व्यर्थ की शिक्षाओं को भूल जाओ। क्रोध से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है कि जब, जिस पर जितना क्रोध आए उसे निकालते चले जाओ।

-दीप त्रिवेदी

शक्तिशाली व सकारात्मक विचार वालों से मिलो तो आप तत्काल ऊर्जा से भर जाते हैं। नकारात्मक विचार के व्यक्ति से मिलते ही हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है। ...सोचो, जो खुद नकारात्मक हो, उसका क्या हाल होता होगा?

-दीप त्रिवेदी

जीना, शौक से जीना, आनंदपूर्वक जीना, सफलता की ओर कदम बढ़ाना वगैरह कैसे अधार्मिक हो जाता है? अधर्म की तो शुरुआत ही डर कर वस्तुओं के त्याग करने से होती है।

-दीप त्रिवेदी

विज्ञान वस्तुओं की सायकोलोजी के रूपांतरण का नाम है। धर्म मनुष्य की सायकोलोजी को रूपांतरित करनेवाले ज्ञान का नाम है। विज्ञान मनुष्य को भौतिक सुख तो दे सकता है, परंतु मानसिक सुख हेतु तो मनुष्य को अपनी सायकोलोजी रूपांतरित करनी ही रही। अतः दोनों का यथायोग्य समन्वय मनुष्य व संसार दोनों के उत्थान का मार्ग है।

-दीप त्रिवेदी

क्या ये ‘क्रिश्चियन’ उसी जीसस के अनुयायी हैं जो सबके उद्धार के लिये हंसते-हंसते सूली चढ़ गए? सच बोलने के बावजूद ‘बाइबल’ के नाम पर पादरियों ने गैलेलियो का जो हाल किया था, उसे देखते हुए मुझे तो ऐसा नहीं लगता।

-दीप त्रिवेदी

हम कितने कमाल हैं? हमारे पास शेर जैसे पंजे नहीं फिर भी सबको काटने दौड़ते हैं। सांप जैसा जहर नहीं, फिर भी खुन्नसें पालते रहते हैं। पक्षी जैसे पंख नहीं फिर भी कल्पना लोक में उड़ते ही रहते हैं। जब आपमें इन्सानों के कोई गुण ही नहीं तो जीवन में सफलता कैसे पाओगे?

-दीप त्रिवेदी

आज के समय में धन का प्रभाव इतना तो बढ़ गया है कि अब धनवान में अलग से अन्य कोई गुण होने की आवश्यकता ही नहीं रह गयी है।

-दीप त्रिवेदी

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