जीवन में आत्मा बेचकर कुछ भी पाने से महंगा सौदा और कुछ नहीं हो सकता है।
-दीप त्रिवेदी
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जीवन में आत्मा बेचकर कुछ भी पाने से महंगा सौदा और कुछ नहीं हो सकता है।
-दीप त्रिवेदी
आप सिर्फ इतना क्यों नहीं समझते कि घटनायें बाहर घट रही हैं और आपका जीवन आपके भीतर है। फिर बाहर चाहे जो न क्यों हो जाए, उससे आपका जीवन क्यों प्रभावित होता है? क्योंकि आप उन घटनाओं को जबरदस्ती अपने से जोड़ कर देखते हैं।
-दीप त्रिवेदी
मनुष्य जीवन के लिये सबसे बड़ा अभिशाप भय, झूठी-आशा व निर्भरता है। तथाकथित धार्मिक पांखड के कारण इन तीनों के अलावा आपको और कुछ नहीं मिलता।
-दीप त्रिवेदी
सारे बड़े व महत्वपूर्ण कार्य होते हैं, किये नहीं जा सकते। फिर चाहे वह पृथ्वी का घूमना हो या आपका खाना पचाना। वह चाहे हवाओं का बहना हो या आपका सांस लेना। और चाहे वह कोई मीठी धुन बनाना हो या कोई आविष्कार करना हो।
-दीप त्रिवेदी
समय बलवान है व समय के लाखों स्वरूप हैं। समय के हर स्वरूप को समझने व पहचानने वाला ही सुख व समृद्धि से भरा जीवन जी सकता है।
-दीप त्रिवेदी
क्या ये ‘क्रिश्चियन’ उसी जीसस के अनुयायी हैं जो सबके उद्धार के लिये हंसते-हंसते सूली चढ़ गए? सच बोलने के बावजूद ‘बाइबल’ के नाम पर पादरियों ने गैलेलियो का जो हाल किया था, उसे देखते हुए मुझे तो ऐसा नहीं लगता।
-दीप त्रिवेदी
हम कौन से मन में जीयेंगे उसका फैसला हमारे भीतर की ऊर्जा करती है। हमारे अंदर जितनी ज्यादा ऊर्जा संग्रहित होती है...उतना ही हम गहरे से जीना शुरू कर देते हैं।
-दीप त्रिवेदी
जागृत व्यक्ति के लक्षण क्या हैं? एक तो वह सिर्फ अपनी मरजी से जाता और आता है। दूसरा बाहर की दुनिया के कोई कारण उसे प्रभावित नहीं करते। और तीसरा, वह जो कार्य करने की ठान लेता है, उसे पूरा करके ही दम लेता है।
-दीप त्रिवेदी
Concentration एक जादू है, क्योंकि Concentration में ऊर्जा सरक्युलर घूमती है। दूसरी तरफ पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा भी सरक्युलर घूमती है। इसीलिये Concentration में हमारी प्रकृति से ट्युनिंग बैठ जाती है। और एक बार प्रकृति से Tuning बैठ गयी फिर जीवन सुख और समृद्धि से भरा ही समझो। अतः यदि बड़ी सफलता पानी हो तो हर छोटे-से छोटा कार्य ध्यान से करना सीखना ही होगा।
-दीप त्रिवेदी
आदिकाल से धर्मगुरुओं व राजनेताओं की बनती चली आ रही है। दोनों में से कोई ना तो कलाकार है, ना ही वैज्ञानिक। फिर भी सबको दबाकर व लड़वाकर बड़ा बनने की चाह शुरू से ही दोनों में है। इसी से अब उन दोनों का मिलन अटूट हो चुका है।
-दीप त्रिवेदी