हमारे भीतर की आत्मा ही इस जगत की सबसे ज्यादा शक्तिशाली शक्ति है। यह आत्मा ही परमात्मा है। यह सब सुनने-समझने के बावजूद हम मंदिर-मस्जिदों में जाते हैं...तो यह सिवाय स्वयं की आत्मा पर अश्रद्धा के और क्या दर्शाता है?
-दीप त्रिवेदी