कोटेशन्स
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धर्मगुरु दुनिया को भ्रमित कर अपनी दुकानें चला रहे, यह तो छोटा गुनाह है। उनका बड़ा गुनाह तो यह कि वे श्रेष्ठ मनुष्यों के गुण व उनकी सोच को दबाकर तथा व्यर्थ के चमत्कारों से उनको जोड़ के अपनी दुकान चला रहे हैं।

-दीप त्रिवेदी

धार्मिक शास्त्र हजारों वर्ष पुराने हैं। वे जाने कबसे मनुष्य के उद्धार में लगे पड़े हैं। फिर भी मनुष्य के दुःख-दर्दों को देखते हुए वे पूरी तरह असफल सिद्ध हुए हैं। अब समय आ गया है...जब नये विचारों को अपनाया जाए।

-दीप त्रिवेदी

अच्छा बनने या अच्छा सीखने की आवश्यकता किसी को महसूस नहीं होती, परंतु अच्छा दिखने में कोई रत्तीभर कसर नहीं छोड़ता।

-दीप त्रिवेदी

प्रकृति में ऊर्जा के दो ही केन्द्र बिन्दु हैं, एक ‘क्रोध’ व दूसरा ‘प्रेम’। परंतु दुर्भाग्य से Science... Psychology की दृष्टि से देखना जानता ही नहीं। यहां ऊर्जा उत्पन्न या तो दो वस्तुओं के घर्षण यानी ‘क्रोध’ से होती है, या यह ऊर्जा उत्पन्न दो वस्तुओं के मिलन यानी ‘प्रेम’ से होती है।

-दीप त्रिवेदी

जिन्होंने भी जीवन में बड़ी सफलता पायी है, उन्होंने जाने-अनजाने दृढ़तापूर्वक मन की चार में से कोई एक राह पकड़ी ही हुई है; आनंद, स्वभाव, सहजता या स्वतंत्रता। और जो पकड़ी है...फिर उसका हरहाल में लगातार साथ दिया है।

-दीप त्रिवेदी

हर प्रकार की ‘जलन’ ना सिर्फ आपकी असफलता, बल्कि साथ में आपके अविश्वास को भी दर्शाती है। साथ ही आप यह भी गौर नहीं करते कि आप जिससे जलते हैं... आपकी जलन उल्टा उसे और आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित ही करती है।

-दीप त्रिवेदी

जैसे विज्ञान को किसी वस्तु के रूपांतरण हेतु ‘‘ऊर्जा’’ की आवश्यकता पड़ती है, वैसे ही आपको अपना स्वभाव बदलने हेतु भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि आप में ऊर्जा नहीं तो चाहकर भी आप अपने में बदलाव नहीं ला सकते हैं।

-दीप त्रिवेदी

ज्ञान के बड़े-बड़े दावे करने वाला यह मनुष्य दूसरों के बाबत या दूसरे विषयों पर अपनी हजार रायें ऐसे जाहिर करता है मानो उससे बड़ा ज्ञानी कोई हो ही नहीं; लेकिन ‘नींद’, जिसमें वह जीवन का एक-तिहाई हिस्सा गुजारता है, उस बाबत उसे कुछ नहीं मालूम... क्या यह हास्यास्पद नहीं लगता?

-दीप त्रिवेदी

यह सच ही है कि कण-कण में भगवान समाया हुआ है। परंतु समझ यह नहीं आता कि फिर अलग से यह मंदिर क्यों?

-दीप त्रिवेदी

समय के सिर्फ एक स्वरूप यानी ‘वर्तमान’ से प्रकाशित इस जगत में कैसे एक पल से ज्यादा बटोरने की कोशिश में लगा कोई व्यक्ति कभी भी सफल हो सकता है?

-दीप त्रिवेदी

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